रांची के शिवम राज बने Google इंजीनियर, पाई दो करोड़ की सालाना सैलरी

झारखंड की राजधानी रांची के शिवम राज ने कठिन संघर्ष और मेहनत से अपनी किस्मत बदल दी है। आज वे गूगल (Google) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें दो करोड़ रुपये का सालाना पैकेज मिला है। लेकिन उनकी यह सफलता आसान नहीं थी।
12वीं में 74% अंक से रुक गए थे सपने
शिवम की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो असफलता के कारण हार मान लेते हैं। 12वीं की परीक्षा में उन्हें केवल 74% अंक मिले थे, जबकि देश के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए न्यूनतम 75% की शर्त होती है। महज एक प्रतिशत की कमी ने उनके सपनों को रोकने की कोशिश की।
लेकिन शिवम ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक साल का ड्रॉप लेकर दोबारा 12वीं की परीक्षा दी और इस बार 86% अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड दोनों परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर इंजीनियरिंग की राह चुनी।
BIT मेसरा से B.Tech, फिर Google तक का सफर
शिवम ने अपनी स्कूली पढ़ाई JVM श्यामली से की और 2021 में BIT मेसरा से कंप्यूटर साइंस में बीटेक पूरा किया। कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान उन्हें 52 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला, जो उनके करियर की शानदार शुरुआत थी।
इसके बाद उन्होंने दो साल तक फ्रंटएंड डेवलपर के रूप में काम किया और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में अनुभव हासिल किया। साल 2025 में शिवम ने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स, ऐमहर्स्ट (USA) से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने Google में आवेदन किया, चार कठिन इंटरव्यू राउंड पास किए और अंततः उन्हें Google से 2 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज ऑफर मिला।
परिवार और पृष्ठभूमि
शिवम मूल रूप से गुमला जिले के कामडारा प्रखंड के सालेगुटू गांव के रहने वाले हैं और वर्तमान में रांची के अरगोड़ा में रहते हैं। उनके पिता प्रो. राजकुमार ओहदार एनआईएएमटी रांची में प्रोफेसर हैं, जबकि मां डॉ. अर्चना कुमारी मरवाड़ी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक हैं।
सफलता का मंत्र: निरंतर पढ़ाई और तकनीक से लगाव
शिवम ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर पढ़ाई और सीखने की ललक को दिया। उनका कहना है कि 12वीं में अपेक्षित अंक न आने के बाद उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और लगातार सुधार करते गए।
उनका मानना है कि “ज्यादा पढ़ाई करने से बेहतर है कि निरंतर पढ़ाई की जाए।” तकनीक के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे हमेशा नई चीजें सीखने को तैयार रहते हैं। शिवम कहते हैं कि असफलता को निराशा नहीं, बल्कि सुधार का अवसर मानना चाहिए।
प्रेरणा युवाओं के लिए
शिवम की यह सफलता उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो कभी असफलता का सामना करते हैं। उन्होंने साबित किया है कि मेहनत, धैर्य और निरंतरता से किसी भी सपने को पूरा किया जा सकता है।
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